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बिना डॉक्टर के मरीजों का रेफर का नहीं थम रहा सिलसिला, गोंदिया जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

Oct 6
2 min read

डॉक्टरों की गैरमौजूदगी में मरीजों को किया जा रहा रेफर करने का आरोप, नर्सों के व्यवहार को लेकर भी शिकायतें; जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग


जनचेतना/गोंदिया :- जिले के ग्रामीण एवं सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं रहते, जबकि कुछ डॉक्टर ओपीडी के बाद मुख्यालय पर रहने के बजाय गोंदिया लौट आते हैं और जरूरत पड़ने पर फोन के माध्यम से ही संपर्क में रहते हैं। इससे गंभीर स्थिति में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायतों के अनुसार, डॉक्टरों की गैरमौजूदगी में कई बार मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सीधे गोंदिया रेफर कर दिया जाता है। इससे जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है और वहां पहले से मौजूद स्वास्थ्य सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर उपचार नहीं मिलने से मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी और बढ़ जाती है। वहीं, कुछ मरीजों के परिजनों ने स्वास्थ्य केंद्रों में मौजूद कर्मचारियों एवं नर्सिंग स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई है। आरोप है कि डॉक्टर के उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में मरीजों के परिजनों को उचित जानकारी देने के बजाय उन्हें डराकर या दबाव बनाकर रेफर करने की स्थिति पैदा की जाती है। हालांकि, इन आरोपों की विभागीय स्तर पर जांच होना आवश्यक है।



सरकार के नियमों के अनुसार जिन डॉक्टरों को संबंधित स्वास्थ्य केंद्र के मुख्यालय में रहने की जिम्मेदारी दी गई है और जहां उनके लिए शासकीय आवास उपलब्ध हैं, वहां उनकी उपलब्धता सुनिश्चित होना जरूरी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिन डॉक्टरों को क्वार्टर उपलब्ध कराए गए हैं, वे मुख्यालय पर क्यों नहीं रहते? यदि किसी डॉक्टर को मुख्यालय से बाहर रहने की अनुमति है, तो उसकी स्पष्ट जानकारी भी सामने आनी चाहिए। स्वास्थ्य सेवा सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा विषय है। डॉक्टर की अनुपस्थिति, अनावश्यक रेफरल और मरीजों के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना आवश्यक है। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग को इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की उपस्थिति कितनी है, मुख्यालय में रहने के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं और मरीजों को किन परिस्थितियों में रेफर किया जा रहा है। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल स्थानीय स्तर पर उठ रही इन शिकायतों ने जिले की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



 
 
 

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