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विदर्भ बनेगा देश का माइनिंग व स्टील हब! CM फडणवीस बोले- गढ़चिरौली से होगी देश की क्लीन ग्रीन स्टील क्रांति

Sep 11
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अनंत चेतना/मुंबई :- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि विदर्भ में माइनिंग के जरिए भारत की आर्थिक वृद्धि का मुख्य इंजन बनने की क्षमता है। यह 'विकसित भारत 2047' के विजन में अहम योगदान दे सकता है। गढ़चिरौली में माइनिंग सेक्टर में एक नया इकोसिस्टम उभर रहा है, जिससे देश में पहली 'क्लीन ग्रीन स्टील क्रांति' की शुरुआत हो रही है। मुख्यमंत्री 'द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया)' के नागपुर लोकल सेंटर द्वारा आयोजित माइनिंग इंजीनियर्स के दो-दिवसीय 36वें राष्ट्रीय सम्मेलन और 'माइनिंग फॉर विकसित भारत 2047' पर एक राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री ने माइनिंग सेक्टर में नई रिसर्च को दिखाने वाली एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया।

₹5 लाख करोड़ का निवेश और कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स

विदर्भ की भरपूर खनिज संपदा, खासकर गढ़चिरौली में आयरन ओर (लौह अयस्क) के भंडार का जिक्र करते हुए, मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि इस क्षेत्र में लगभग 5 लाख करोड़ रुपए का निवेश और लगभग 50 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) की स्टील उत्पादन क्षमता विकसित की जा रही है। एक नए राष्ट्रीय मिशन के तहत, प्रस्तावित आठ कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स में से चार विदर्भ को दिए गए हैं।

औद्योगिक इकोसिस्टम और रोजगार के अवसर

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि गढ़चिरौली के साथ चंद्रपुर, भंडारा, नागपुर, गोंदिया और यवतमाल जिलों में भी एक नया इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम विकसित किया जा सकता है। ग्रीन स्टील, क्लीन टेक्नोलॉजी और बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार और आर्थिक अवसर पैदा होंगे।

माइनिंग सेक्टर की चुनौतियाँ और बुनियादी ढांचा

अपने शुरुआती भाषण में, आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. संदीप शिरखेड़कर ने माइनिंग सेक्टर के सामने आने वाली मुख्य चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने क्रिटिकल मिनरल्स, आधुनिक टेक्नोलॉजी और माइन क्लोजर प्रोसेस पर व्यापक चर्चा की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने क्रिटिकल मिनरल्स निकालने और इस्तेमाल करने के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने के साथ-साथ ट्रेनिंग सेंटर, आर्बिट्रेशन सुविधाएं और टेस्टिंग लैब स्थापित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।


 
 
 

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