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18 साल से न्याय की आस में भटक रहा BPL किसान, म्यूटेशन एंट्री विवाद से जीवन संकट में

  • Apr 29
  • 2 min read

जनचेतना/मुंबई/सचिन बोपचे /गोंदियागोंदिया: गोंदिया तहसील के एक गरीब किसान अनिल शिवनकर पिछले 18 वर्षों से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें अंतिम राहत नहीं मिल पाई है। भूमि से जुड़े म्यूटेशन एंट्री विवाद के कारण उनका और उनके परिवार का जीवन गंभीर संकट में आ गया है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला Rev. Appeal No. RTS-64/Dagotola-5/2007-08 से संबंधित है, जिस पर दिनांक 27 अक्टूबर 2008 को आदेश जारी किया गया था। इसके बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कई बार जांच और कार्यवाही की प्रक्रिया चली, लेकिन अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। रद्द की गई म्यूटेशन एंट्री आज भी रिकॉर्ड में यथावत बनी हुई है, जिससे किसान को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


अनिल शिवनकर का कहना है कि वह एक BPL श्रेणी के किसान हैं और लंबे समय से न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इस दौरान उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है और परिवार का पालन-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है। लगातार संघर्ष के कारण वे मानसिक और सामाजिक रूप से भी काफी परेशान हैं।


वर्तमान में यह मामला गोंदिया तहसीलदार श्री समशीर पठान के समक्ष विचाराधीन है। पीड़ित किसान द्वारा इस संबंध में मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई है (Request No.: TAL/REVR/GOND/2026/1)। इसके बावजूद, उच्च अधिकारियों द्वारा पूर्व में दिए गए आदेशों के बाद भी अंतिम कार्यवाही लंबित है।


किसान ने प्रशासन से विनम्र अपील करते हुए कहा है कि उनके मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखते हुए जल्द से जल्द निर्णय लिया जाए और रद्द की गई म्यूटेशन एंट्री को पुनः उनके नाम पर दर्ज किया जाए, ताकि उनके परिवार को इस संकट से राहत मिल सके।


साथ ही उन्होंने मीडिया और समाज से भी सहयोग की अपील की है, ताकि एक गरीब किसान को न्याय मिल सके। उनका कहना है कि अब और देरी उनके लिए असहनीय हो गई है और उन्हें जल्द से जल्द उनका हक दिलाया जाए।






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