केशोरीवासियों की सुध कब लेगा प्रशासन? 70 किमी का सफर, 20 साल से जारी संघर्ष
- Mar 23
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जनचेतना/गोंदिया/सचिन बोपच

गड़चिरोली और चंद्रपुर की सीमा से सटे गोंदिया जिले के अंतिम छोर पर स्थित अर्जुनी मोरगांव तहसील का केशोरी गांव लगभग 7 हजार की आबादी वाला आदिवासी बहुल क्षेत्र है। तहसील मुख्यालय अर्जुनी मोरगांव से केशोरी की दूरी 70 किमी से अधिक है, जिसके कारण स्थानीय नागरिकों को विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। भौगोलिक और सामाजिक दृष्टि से अलग पहचान रखने वाले इस गांव को तहसील घोषित करने की मांग ‘तहसील निर्माण संघर्ष समिति’ पिछले 20 वर्षों से लगातार कर रही है। इसके बावजूद शासन स्तर पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है, जिससे नागरिकों में गहरा असंतोष व्याप्त है। जिले की स्थापना को 24 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन केशोरी क्षेत्र के लोगों को आज भी बुनियादी प्रशासनिक सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
तहसील के रूप में सुसज्ज है व्यवस्था
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केशोरी को तहसील बनाने के लिए आवश्यक भौगोलिक और प्रशासनिक मानक पहले से ही पूरे हैं। यदि केशोरी को नई तहसील घोषित किया जाता है, तो आदिवासी बहुल इस क्षेत्र की कई समस्याएं स्वतः दूर हो सकती हैं और विकास कार्यों को गति मिल सकती है। यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा है, जिससे वन-आधारित उद्योगों की संभावना भी प्रबल है और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
45 गांवों का प्रमुख बाजार केंद्र
अर्जुनी मोरगांव तहसील का विस्तार काफी बड़ा है, जिसमें 75 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। केशोरी में पुलिस स्टेशन, दो एओपी, एक एचडीएफसी बैंक, एक गोंदिया जिला सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, तीन हाईस्कूल, तीन उच्च माध्यमिक विद्यालय, एक महाविद्यालय, दो प्राथमिक विद्यालय, एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, छह राजस्व मंडल, वन विभाग कार्यालय और आदिवासी महामंडल की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा मिर्ची फसल का प्रमुख बाजार, प्रतापगढ़, इटियाडोह, तिब्बती कैंप और पर्यटन स्थलों के कारण केशोरी लगभग 45 गांवों का मुख्य बाजार केंद्र बन चुका है।
दूरी से बढ़ रही परेशानी
इस क्षेत्र के गांवों के नागरिकों को अर्जुनी मोरगांव तहसील पहुंचने के लिए 70 किमी की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे आर्थिक, मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नागरिकों का कहना है कि केशोरी को तहसील घोषित करने से इस आदिवासी क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी, क्योंकि वर्तमान में यह क्षेत्र विकास की दृष्टि से काफी पिछड़ा हुआ है।




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