गोंदिया जिले में धान फसल पर तुडतुड़ों का प्रकोप, किसानों को एकीकृत कीट प्रबंधन की सलाह
अनंत चेतना/गोंदिया/विवेक हरिनखेड़े :- जिले में लगातार बदलते मौसम और बढ़ी हुई आर्द्रता के कारण धान (भात) की फसल पर तुडतुड़ों का प्रकोप बढ़ता दिखाई दे रहा है। समय रहते वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल को नुकसान पहुंचने के साथ ‘हॉपर बर्न’ की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। इस स्थिति को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), हिवरा, गोंदिया की ओर से धान उत्पादक किसानों को तत्काल एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाने का आह्वान किया गया है।

5 से 10 तुडतुड़े मिलें तो करें उपाय
कृषि विज्ञान केंद्र के विषय विशेषज्ञों के अनुसार किसानों को खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए। प्रति चुड/पोंगा 5 से 10 तुडतुड़े दिखाई देने पर नियंत्रण के उपाय तुरंत शुरू करने की सलाह दी गई है।
पानी का उचित प्रबंधन जरूरी
खेत में लगातार पानी जमा रहने से तुडतुड़ों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है। इसलिए 2 से 3 दिन के अंतराल पर खेत का पानी बाहर निकालकर जमीन को वाफसा स्थिति में रखने की सलाह दी गई है। साथ ही खेत में सूर्यप्रकाश और हवा का उचित संचार बनाए रखने के लिए हर 2 से 3 मीटर पर करीब 30 सेंटीमीटर की गल्ली रखने को कहा गया है। किसानों को यूरिया जैसे नत्रयुक्त उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग नहीं करने तथा नत्र की मात्रा को विभाजित करके देने की सलाह भी दी गई है।
जैविक नियंत्रण का विकल्प
तुडतुड़ों के नियंत्रण के लिए मेटारायझियम ॲनिसोप्ली जैसी जैविक बुरशी का उपयोग भी किया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र की मार्गदर्शिका में इसका 2.5 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करने की सलाह दी गई है।
अधिक प्रकोप होने पर रासायनिक नियंत्रण
अधिक प्रादुर्भाव की स्थिति में कृषि विज्ञान केंद्र की दी गई तकनीकी सलाह के अनुसार निम्न विकल्पों में से किसी एक का उपयोग किया जा सकता है:
बुप्रोफेझिन 25% SC: 16 मिली प्रति 10 लीटर पानी
फ्लोनीकॅमीड 50% WG: 3 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी
पायमेट्रोझिन 50% WDG: 6 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी
महत्वपूर्ण: कीटनाशक का अंतिम उपयोग हमेशा संबंधित उत्पाद के लेबल/पंजीकृत फसल-कीट उपयोग, स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह और निर्धारित मात्रा के अनुसार ही करें।
पायरेथ्रॉईड के इस्तेमाल से बचने की सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र ने सिंथेटिक पायरेथ्रॉईड्स, जैसे साइपरमेथ्रिन और डेल्टामेथ्रिन, अथवा अनावश्यक मिश्रित कीटनाशकों के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी है। मार्गदर्शिका के अनुसार इनके उपयोग से तुडतुड़ों की पुनरुत्पत्ति यानी Resurgence की समस्या बढ़ सकती है। तुडतुड़े मुख्य रूप से पौधे के निचले हिस्से में पाए जाते हैं। इसलिए फसल में पानी निकालने के बाद फसल के बुंधे/निचले हिस्से को लक्ष्य करते हुए उचित तरीके से फवारणी करने की सलाह दी गई है।
फवारणी के दौरान सुरक्षा जरूरी
किसानों को फवारणी करते समय मास्क/रुमाल, सुरक्षा चश्मा और रबरी दस्ताने पहनने की सलाह दी गई है। फवारणी सुबह या शाम के समय शांत वातावरण में करनी चाहिए तथा हवा की दिशा के विपरीत फवारणी से बचना चाहिए। फवारणी के दौरान धूम्रपान, तंबाकू सेवन या भोजन-पानी लेने से बचें। काम पूरा होने के बाद हाथ-पैर साबुन से अच्छी तरह धोने तथा फवारणी के कपड़े अलग से साफ करने की सलाह दी गई है।
धान की फसल को तुडतुड़ों से बचाने के लिए समय पर खेत का निरीक्षण, पानी और उर्वरक का संतुलित प्रबंधन तथा तज्ज्ञांच्या मार्गदर्शनाखाली योग्य कीड नियंत्रण उपाय करणे आवश्यक आहे. अधिक जानकारी के लिए किसान कृषि विज्ञान केंद्र, हिवरा (गोंदिया) के विषय विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।





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