देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल और डीजल का उपयोग कम करने की अपील किए जाने के बाद देशभर में कई मुख्यमंत्री, मंत्री और भाजपा नेता अचानक अलग अंदाज में नजर आने लगे। कोई मेट्रो में सफर करता दिखाई दिया, तो किसी ने साइकिल चलाकर ईंधन बचाने का संदेश दिया। कई नेता कार छोड़ बाइक और ऑटो रिक्शा में सफर करते हुए कैमरों में कैद हुए। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों और वीडियो को बड़े स्तर पर प्रचारित किया गया। हालांकि यह पूरा अभियान केवल एक दिन तक ही सीमित दिखाई दिया। अगले ही दिन फिर वही नेता लग्जरी गाड़ियों और बड़े-बड़े काफिलों के साथ सड़कों पर नजर आने लगे। ऐसे में अब जनता के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि नेताओं की यह सादगी क्या सिर्फ दिखावे और फोटो सेशन तक ही सीमित थी? पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने तोड़ी आम आदमी की कमर वहीं दूसरी ओर पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नौकरीपेशा लोग, किसान, छोटे व्यापारी और रोजाना वाहन उपयोग करने वाले नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि अब बाइक और कार में पेट्रोल भरवाना भी जेब पर भारी पड़ने लगा है। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी इसका गहरा असर देखने को मिल रहा है। गांवों में खेती और माल ढुलाई का खर्च बढ़ने से किसानों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। ट्रांसपोर्ट महंगा, बाजार में बढ़ी हर चीज की कीमत पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहा। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से बाजार में लगभग हर जरूरी वस्तु के दाम बढ़ गए हैं। सब्जियां, दूध, फल, अनाज, किराना और अन्य दैनिक उपयोग की चीजें लगातार महंगी होती जा रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि माल ढुलाई महंगी होने के कारण सामान की लागत बढ़ रही है, जिसका सीधा असर बाजार और आम ग्राहकों पर पड़ रहा है। यही वजह है कि महंगाई लगातार लोगों का बजट बिगाड़ रही है। “दिखावे की सवारी से नहीं, सस्ते पेट्रोल से मिलेगी राहत” आम नागरिकों का कहना है कि केवल एक दिन साइकिल चलाने या मेट्रो में सफर करने से जनता को राहत नहीं मिलने वाली। लोगों का मानना है कि सरकार को पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए ताकि महंगाई पर नियंत्रण पाया जा सके। सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने नेताओं की एक दिन की सवारी को “फोटो सेशन” और “दिखावा” बताया। लोगों का कहना है कि यदि सच में ईंधन बचत को लेकर गंभीरता होती तो यह बदलाव लगातार दिखाई देता। आर्थिक जानकारों ने भी जताई चिंता आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से हर वस्तु की लागत बढ़ती है और इसका सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो आने वाले समय में महंगाई और अधिक बढ़ सकती है। जनता पूछ रही सवाल अब आम जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर नेताओं की एक दिन की साइकिल, बाइक और मेट्रो वाली सवारी से क्या बदला? क्योंकि आज भी आम आदमी हर दिन महंगे पेट्रोल, डीजल and बढ़ती महंगाई के बीच अपना घर चलाने के लिए संघर्ष कर रहा है। जनता का कहना है कि केवल संदेश और दिखावे से नहीं, बल्कि जमीन पर राहत देने वाले फैसलों से ही लोगों को वास्तविक फायदा मिल सकता है।