गोंदिया जिले में मनरेगा योजना के तहत चल रहे कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और मजदूरों के शोषण की खबरों ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। ग्रामीणों और स्थानीय मजदूरों द्वारा लगाए गए आरोप यदि सही साबित होते हैं, तो यह मामला जिले के सबसे बड़े मनरेगा घोटालों में से एक माना जा सकता है। जानकारी के अनुसार “मातोश्री पांदन रास्ता” निर्माण कार्य में मनरेगा मजदूरों के नाम का उपयोग केवल सरकारी रिकॉर्ड और फोटो खिंचवाने तक सीमित रखा जा रहा है। आरोप है कि मजदूरों की तस्वीरें लेकर फर्जी उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जबकि वास्तविक निर्माण कार्य अन्य मजदूरों से करवाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा के तहत काम करने वाले गरीब मजदूरों को सप्ताहभर की मेहनत के बदले मात्र ₹500 दिए जा रहे हैं। यानी प्रतिदिन सिर्फ ₹100। जबकि सरकारी रिकॉर्ड में कहीं ज्यादा भुगतान दर्शाए जाने की आशंका जताई जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि योजना मनरेगा के तहत है, तो फिर असली मजदूरों को काम से दूर क्यों रखा जा रहा है? आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है? स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में निकृष्ट दर्जे की सामग्री उपयोग करने का भी आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जा रहा, जिससे सरकारी धन की बर्बादी और भ्रष्टाचार की बू साफ दिखाई दे रही है। यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो करोड़ों रुपये की योजनाएं कागजों में पूरी दिखाकर जनता के पैसे का दुरुपयोग होने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी या मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल संभव नहीं है। मजदूरों का कहना है कि उन्हें केवल फोटो के लिए बुलाया जाता है ताकि रिकॉर्ड में काम दिखाया जा सके, लेकिन वास्तविक मजदूरी और रोजगार से उन्हें वंचित रखा जा रहा है। एक तरफ देश में बेरोजगारी और महंगाई लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ गरीबों को रोजगार देने वाली योजनाओं में भी यदि भ्रष्टाचार हो रहा है तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। मजदूरों का कहना है कि सरकार की योजनाएं जमीन पर गरीबों तक नहीं पहुंच रहीं, बल्कि बीच में ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं। अब ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। लोगों ने मांग की है कि इस कथित घोटाले में शामिल अधिकारियों, ठेकेदारों और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा मजदूरों को उनका अधिकार दिलाया जाए। गोंदिया जिले में उठे इन सवालों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।