गोंदिया–बालाघाट मार्ग बना जनता के लिए मुसीबत !
- May 28
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2 वर्षों से अधूरा सड़क निर्माण, जगह-जगह दरारें, दुर्घटनाएं और व्यापार चौपट
ठेकेदार और प्रशासन की लापरवाही से नागरिक परेशान, सर्विस रोड और पार्किंग की सुविधा तक नहीं
अनंत चेतना/गोंदिया/विवेक हरिनखेड़े :- गोंदिया से बालाघाट को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग इन दिनों लोगों के लिए विकास नहीं बल्कि परेशानी, दुर्घटनाओं और अव्यवस्था का प्रतीक बन गया है। लगभग 10 से 13 किलोमीटर लंबे इस महत्वपूर्ण मार्ग का निर्माण कार्य पिछले दो वर्षों से जारी है, लेकिन आज तक यह कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। दो राज्यों महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश को जोड़ने वाला यह मार्ग हजारों लोगों के आवागमन का प्रमुख रास्ता है, लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति और निकृष्ट गुणवत्ता ने नागरिकों का गुस्सा बढ़ा दिया है। कई जगहों पर सड़क निर्माण पूरा होने से पहले ही दरारें पड़ने लगी हैं, जबकि कई हिस्सों में सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
अधूरी सड़क बन रही दुर्घटनाओं का कारण

स्थानीय लोगों का कहना है कि मार्ग पर जगह-जगह अधूरा निर्माण, गड्ढे और निर्माण सामग्री फैली रहने से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गोंदिया से मुरपार (रावणवाड़ी) तक सड़क और नालियों का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन पूरे 13 किलोमीटर क्षेत्र में आने वाले 6 गांवों के लिए सर्विस रोड और पार्किंग की कोई सुविधा नहीं दी गई। परिणामस्वरूप वाहन चालक मजबूरी में सड़क पर ही वाहन खड़े कर रहे हैं, जिससे लगातार हादसे और यातायात जाम की स्थिति बन रही है।
व्यापारियों पर भी टूटा संकट
सड़क और नालियों के निर्माण के कारण सड़क किनारे स्थित कई छोटे-बड़े व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। रावणवाड़ी, मुरपार, अभोरा, नागरा और कटंगी जैसे गांवों में व्यवसाय करने वाले व्यापारियों का कहना है कि सर्विस रोड और पार्किंग की सुविधा नहीं होने से ग्राहक दुकानों तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदार और संबंधित विभाग ने बिना सही नियोजन के काम किया, जिसका सीधा नुकसान स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है।
करोड़ों खर्च फिर भी घटिया निर्माण?
स्थानीय नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क कुछ ही समय में टूटने लगे, तो आखिर निर्माण कार्य की गुणवत्ता कैसी रही होगी? लोगों का आरोप है कि निर्माण में निकृष्ट दर्जे की सामग्री का उपयोग किया गया है और प्रशासन पूरी तरह आंखें मूंदे बैठा है।
हरियाली खत्म, बढ़ी तपिश
सड़क निर्माण के दौरान वर्षों पुराने सैकड़ों पेड़ों को काट दिया गया। गोंदिया से रजेगांव और सतोना मार्ग पर करीब 60 से 165 वर्ष पुराने आम, नीम, जामुन और अन्य फलदार पेड़ मौजूद थे, जो यात्रियों को भीषण गर्मी में राहत देते थे। लेकिन अब सड़क के दोनों ओर सिर्फ कंक्रीट और तपती गर्मी नजर आती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पेड़ काटे जाने के बाद अब तक नए पौधों का रोपण नहीं किया गया, जिससे पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ता जा रहा है।
जनता का सवाल — आखिर जिम्मेदार कौन?
लगातार हो रही दुर्घटनाएं, अधूरा निर्माण, व्यापारियों का नुकसान और पर्यावरण को पहुंचा नुकसान अब प्रशासन और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। नागरिकों ने मांग की है कि पूरे सड़क निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही सर्विस रोड, पार्किंग और गुणवत्तापूर्ण निर्माण की व्यवस्था जल्द की जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन जनता की इस पीड़ा को सुनता है या फिर यह सड़क आने वाले समय में और बड़े हादसों का कारण बनती रहेगी।





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