आकोला जिले के खामगांव के एक व्यापारी से फर्जी CBI अधिकारी बनकर 25 लाख रुपये की नकदी लूटने वाले दो आरोपियों को स्थानीय अपराध शाखा (LCB) अकोला ने महज 12 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश किया है। आरोपियों के कब्जे से लूटी गई पूरी 25 लाख रुपये की नकदी, फरियादी का मोबाइल फोन, आरोपियों के मोबाइल फोन तथा दो दोपहिया वाहन सहित कुल 27 लाख 50 हजार रुपये का माल जब्त किया गया है। इस कार्रवाई की जानकारी पुलिस अधीक्षक अर्चित चांडक ने शनिवार को आयोजित प्रेस कॉनफरेन्स में दी। पुलिस के अनुसार, 19 जून 2026 को बालापुर पुलिस थाने में इस संबंध में मामला दर्ज किया गया था। आरोपियों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर खामगांव के एक व्यापारी को अपने झांसे में लिया। इसके बाद उसे कार्रवाई का डर दिखाकर धमकाया गया और जबरन 25 लाख रुपये की नकदी छीनकर आरोपी फरार हो गए। घटना सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू की गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अर्चित चांडक ने स्थानीय अपराध शाखा के पुलिस निरीक्षक नितिन लेव्हरकर को आवश्यक निर्देश देते हुए अपराध का शीघ्र खुलासा करने के लिए तीन विशेष टीमों का गठन किया। निरीक्षक लेव्हरकर के नेतृत्व में एलसीबी के अधिकारियों और करीब 20 पुलिसकर्मियों की टीम ने दिन-रात लगातार जांच अभियान चलाया। जांच के दौरान खामगांव से बालापुर मार्ग पर लगे लगभग 50 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की बारीकी से पड़ताल की गई। तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन और गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले। इन सुरागों के आधार पर पुलिस ने खामगांव निवासी हार्दिक गुरबानी (22) और साहिल नथ्थानी (25) की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। अकोला में गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से लूट की पूरी 25 लाख रुपये की नकदी बरामद कर ली गई है। इसके अलावा फरियादी का एंड्रॉइड मोबाइल फोन, जिसकी कीमत करीब 10 हजार रुपये है, दो मोटरसाइकिलें जिनकी कीमत लगभग 2 लाख रुपये बताई गई है तथा दो मोबाइल फोन, जिनकी कीमत करीब 40 हजार रुपये है, भी जब्त किए गए हैं। जब्त किए गए माल की कुल कीमत 27 लाख 50 हजार रुपये आंकी गई है। पुलिस अधीक्षक अर्चित चांडक ने बताया कि स्थानीय अपराध शाखा(LCB) की सतर्कता, तकनीकी जांच और लगातार 12 घंटे की अथक मेहनत के कारण इस गंभीर अपराध का खुलासा इतने कम समय में संभव हो सका। उन्होंने जांच में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए उत्कृष्ट कार्य के लिए एलसीबी की टीम को 25 हजार रुपये के पुरस्कार की घोषणा भी की है।