ग्रामीण रुग्णालय रजेगांव में स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी, डॉक्टर नदारद – मरीजों को करना पड़ रहा भारी परेशानियों का सामना.
- Mar 13
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Updated: Mar 22
दोपहर 2:30 बजे अस्पताल पहुंचे मरीजों को नहीं मिला डॉक्टर, मेडिकल ऑफिसर के कक्ष में इंटर्न सोता हुआ मिला, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
गोंदिया:

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति किस तरह से लापरवाही का शिकार हो रही है, इसका ताजा उदाहरण ग्रामीण रुग्णालय रजेगांव में देखने को मिला। यहां डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जब कुछ मरीज दोपहर लगभग 2:30 बजे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे, तब अस्पताल में ड्यूटी पर रहने वाले डॉक्टर मौजूद नहीं थे। बताया जा रहा है कि ड्यूटी पर रहने वाली डॉ. सुप्रिया बोरकर उस समय अस्पताल में उपस्थित नहीं थीं।
मरीजों ने जब मेडिकल ऑफिसर के कक्ष में जाकर देखा तो वहां एक इंटर्न बेड पर सोता हुआ पाया गया, जिससे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए। डॉक्टर के अभाव में मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ा और कई मरीजों को बिना इलाज के ही इंतजार करना पड़ा।
इस घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल में कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया। अस्पताल के कर्मचारियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन मरीजों में नाराजगी साफ दिखाई दी। ग्रामीणों का कहना है कि यह अस्पताल आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए इलाज का मुख्य केंद्र है, ऐसे में डॉक्टर का समय पर उपलब्ध न होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कर्मचारियों द्वारा वैद्यकीय अधीक्षक (मेडिकल सुपरिंटेंडेंट) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके बाद जिला शल्य चिकित्सक को फोन के माध्यम से जानकारी दी गई।
जिला शल्य चिकित्सक ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि इस संबंध में लिखित शिकायत प्राप्त होती है तो शिकायत के आधार पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय नागरिकों और मरीजों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीण रुग्णालयों में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। यदि इस प्रकार की लापरवाही पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में ग्रामीणों को और भी बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।



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